Palitana 5 Chaityavandan In Hindi [upd] Full Site
"श्री शत्रुंजय सिद्धक्षेत्र, दीठे दुर्गति वारे" — इस क्षेत्र के दर्शन मात्र से ही दुर्गति का नाश होता है।
2. शांतिनाथ भगवान चैत्यवंदन (दूसरा पड़ाव)
पालीताणा ५ चैत्यवंदन जैन धर्म के अनुयायियों के लिए एक पवित्र स्थल है, जो अपनी अद्वितीय वास्तुकला और ऐतिहासिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है। इस तीर्थ स्थल का महत्व इस प्रकार है:
यह स्थान वह है जहाँ भगवान आदिनाथ ने निन्यानवे बार समवसरण किया था। यहाँ रायण वृक्ष के नीचे प्रभु के प्राचीन चरण पादुकाएं स्थित हैं。 Tattva Gyan स्थान:
नाभिराया कुल मंडनो, मरुदेवा माय। palitana 5 chaityavandan in hindi full
यह चैत्यवंदन यात्रा की शुरुआत में तलहटी (शत्रुंजय पर्वत के नीचे) में किया जाता है।
"श्री शत्रुंजय सिद्धक्षेत्र, दीठे दुर्गति वारे; भाव भरीने जे चढे, तेने भवपार उतारे।"
प्रगट नाम पुंडरीक जिसका, महिमा महांत।
रायण पगला चैत्यवंदन (Rayan Pagla) दीठे दुर्गति वारे
प्रभु आदिनाथ के प्रथम गणधर पुंडरीक स्वामी इसी पर्वत पर करोड़ों मुनियों के साथ मोक्ष गए थे। उन्हीं के नाम पर इसे 'पुंडरीक गिरि' भी कहा जाता है।
यह तीर्थ की तलहटी में स्थित है। यात्रा शुरू करने से पहले यहाँ वंदन करना अनिवार्य माना जाता है。 स्थान:
पाँच इंद्रियों से हुआ पाप, मन-वचन-काया से हुआ पाप, रात-दिन किए सब पाप, दिन में विचरण करते हुए किए पाप, मैं सबकी प्रतिक्रमण (क्षमा-याचना) करता हूँ।
इसके बाद 'जं किंचि नाम तित्थं' और 'नमुत्थुणं' (शक्रस्तव सूत्र) का पाठ करें। भाव भरीने जे चढे
तीन बार खमासमण सूत्र बोलकर झुककर प्रणाम करें। चैत्यवंदन सूत्र:
शत्रुंजय गिरिराज पर कदम-कदम पर अनंत सिद्ध आत्माओं ने मोक्ष प्राप्त किया है। यहाँ विधिपूर्वक 5 चैत्यवंदन करने से जीव को निम्नलिखित लाभ मिलते हैं:
पुंडरीक गणधर वंदिए, पावन तीरथ शीश।चैत्र पूनम के दिने, शिव पहोते जगदीस॥पांच कोडि मुनि संग में, कीधो अनशन ध्यान।शत्रुंजय महिमा बढ़ी, पायो पद निरवाण॥